Our Achievements
अनोखा समाज का उद्देश्य हमेशा से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना रहा है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए, अनोखा समाज द्वारा कुआरी स्थित बजरंगबली मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा पाठ की नियमित शुरुआत करवाई गई। यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में भी एक सराहनीय और प्रेरणादायक कदम साबित हो रही है।
इस पहल से पूर्व अक्सर यह देखा जाता था कि मंदिर परिसर एवं उसके आसपास बच्चों का समय ताश खेलने, यूँ ही इधर-उधर पड़े रहने, तथा कभी-कभी सिगरेट, गुटखा जैसी बुरी आदतों की ओर बढ़ने में व्यतीत होता था। परिणामस्वरूप मंदिर का पवित्र वातावरण प्रभावित हो रहा था, जो समाज के लिए चिंता का विषय बन चुका था।
लेकिन अनोखा समाज की इस पहल के बाद स्थिति में एक स्पष्ट और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। अब प्रत्येक मंगलवार की संध्या बच्चे स्वयं उत्साह, अनुशासन और श्रद्धा भाव के साथ बजरंगबली मंदिर पहुँचते हैं और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। निरंतर अभ्यास के कारण कई बच्चों को हनुमान चालीसा कंठस्थ भी होने लगी है, जिससे उनके संस्कारों और आत्मिक विकास को मजबूती मिल रही है।
हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार, बच्चों को बचपन से ही हनुमान चालीसा का ज्ञान होना चाहिए, क्योंकि यह केवल भक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि साहस, संयम, सेवा-भाव और आत्मविश्वास का भी स्रोत है। इसी विचारधारा को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक मंगलवार को बच्चों द्वारा हनुमान जी से संबंधित एक शिक्षाप्रद कथा भी प्रस्तुत की जाती है, जिससे उन्हें जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
इस कार्यक्रम की एक विशेष और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि बच्चों को माइक पर बोलने का अवसर प्रदान किया जाता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास विकसित होता है और वे भविष्य में किसी भी मंच पर - चाहे वह सैकड़ों या हजारों लोगों के समक्ष क्यों न हो - अपने विचार स्पष्ट, निर्भीक और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त कर सकें। यह अभ्यास उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए एक सशक्त आधार तैयार कर रहा है।
अनोखा समाज का यह प्रथम प्रयास समाज सुधार की दिशा में एक मजबूत और सार्थक शुरुआत है। यह पहल यह सिद्ध करती है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन, सकारात्मक वातावरण और उचित अवसर प्रदान किए जाएँ, तो वे स्वतः ही गलत आदतों से दूर होकर सही और संस्कारित मार्ग को अपनाने लगते हैं। यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक शांत, अनुशासित और धार्मिक वातावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अनोखा समाज का यह प्रयास इस तथ्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि छोटे-छोटे लेकिन सही दिशा में उठाए गए कदम भी समाज में बड़े और स्थायी बदलाव ला सकते हैं। यह पहल भविष्य में और अधिक बच्चों एवं युवाओं को संस्कार, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की ओर अग्रसर करने का कार्य करेगी।
1. बच्चों के लिए
पढ़ने की आदत विकसित होती है।
स्कूल की पढ़ाई में मदद मिलती है।
नैतिक कहानियों से अच्छे संस्कार मिलते हैं।
2. किशोर और युवाओं के लिए
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान होती है।
सही मार्गदर्शन मिलने से भविष्य बेहतर बनता है।
गलत संगत और नशे से दूरी रहती है।
3. युवतियों और महिलाओं के लिए
शिक्षा और जागरूकता बढ़ती है।
स्वास्थ्य, अधिकार और स्वावलंबन की जानकारी मिलती है।
आत्मविश्वास बढ़ता है।
4. कामकाजी लोगों के लिए
नई जानकारियाँ और कौशल सीखने का अवसर मिलता है।
सरकारी योजनाओं और रोजगार की जानकारी मिलती है।
5. बुज़ुर्गों के लिए
समय का सकारात्मक उपयोग होता है।
धार्मिक, सामाजिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकों से मन प्रसन्न रहता है।
अकेलापन कम होता है और सामाजिक जुड़ाव बना रहता है।
6. पूरे गाँव के लिए
शिक्षा का स्तर बढ़ता है।
सोच में सकारात्मक बदलाव आता है।
जागरूक, एकजुट और विकसित समाज बनता है।